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कोरोना : नहीं सुधर रहा अस्पतालों का रवैया, सरकार जारी कर रही सिर्फ आदेश- कार्यवाही कहीं भी नहीं !!

by Khabar7 - 02-May-2021 | 12:53:42
कोरोना : नहीं सुधर रहा अस्पतालों का रवैया, सरकार जारी कर रही सिर्फ आदेश- कार्यवाही कहीं भी नहीं !!

2 मई 2021,

हाईलाइटस -

प्रदेश के मुखिया की नहीं सुन रहे अस्पताल  !

अस्पतालों की लापरवाही लगातार जारी !

बहाने बनाकर मरीज को भर्ती करने से करते हैं इनकार !

अस्पताल के गेट से ही लौटाए जा रहे मरीज !

लखनऊ !!

कोरोना की सुनामी में उत्तर प्रदेश का हाल भी लगातार बिगड़ता जा रहा है। एक और जहां प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है वहीं प्रदेश में कोरोना से होने वाली मौतों का सिलसिला भी कम नहीं हो रहा है।

ऐसे में प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्राइवेट अस्पतालों को लेकर कई दिशा निर्देश अनेकों बार जारी किए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि किसी भी मरीज को वापस नहीं लौटाया जाएगा लेकिन, अस्पताल है कि अपनी मनमानी करने से बाज ही नहीं आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री के यह भी निर्देश हैं कि, ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों के लिए अस्पताल प्रबंधन ही जिम्मेदार माना जाएगा। इन्हीं दिनों दिशा निर्देशों की कड़ी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल आदेश जारी करके यह भी कहा था कि, किसी भी तीमारदार से मरीज के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर कोई भी अस्पताल नहीं मंगवाएगा लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।

अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए गिड़गिड़ा रहे तीमारदार !

नोएडा से लेकर मेरठ तक मुरादाबाद हो या बरेली, अलीगढ़ हो या आगरा, मथुरा हो या लखनऊ, कानपुर हो या प्रयागराज कमोबेश हर शहर के बड़े अस्पतालों का हाल एक सा ही है। कोरोना संक्रमित मरीज को अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए उनके तीमारदार और रिश्तेदार अस्पताल प्रबंधन के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं।

कोरोना की इस दूसरी सुनामी लहर के बीच प्रदेश के प्राइवेट अस्पतालों ने मरीज को भर्ती करने के लिए तमाम शर्तें भी लागू कर रखी हैं। जिनमें पहली शर्त तो ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम खुद करके लाना है।

हर मरीज के तीमारदारों से रिमेडीसिविर की मांग !

दूसरी शर्त के रूप में जरूरत पड़ने पर, रिमेडीसिविर का इंजेक्शन भी तीमारदारों को ही मुहैया कराना पड़ेगा, हालांकि यह अलग बात है कि, लगभग हर मरीज के तीमारदारों से रिमेडीसिविर इंजेक्शन की मांग की जा रही है। 

रिमेडीसिविर इंजेक्शन के मामले में अस्पतालों की मिलीभगत भी सामने आई है मेरठ और मुरादाबाद में रेमेडीसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए रंगे हाथों पुलिस ने कईयों को दबोचा है। पूछताछ में पकड़े गए लोगों ने बड़े अस्पताल के नाम खोले हैं। जिससे इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर कई अस्पतालों की सांठगांठ भी सामने आई है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ प्राइवेट अस्पतालों में ही इस तरह की लापरवाही हो रही है ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां अस्पताल से गायब एक कोरोना संक्रिमत मरीज का शव मोर्चरी में मिला है। जबकि जिम्स प्रशासन ने उसे 24 अप्रैल को ही डिस्चार्ज करने की बात कही थी। बीते 20 अप्रैल को कोरोना संक्रिमत होने के बाद 47 वर्षीय महेश जिम्स में भर्ती हुए थे। कई दिनों से महेश के परिजन अस्पताल प्रशासन से महेश की जानकारी मांग रहे थे।
अस्पताल प्रशासन ने पहले तो महेश के डिस्चार्ज होने की बात कही फिर अस्पताल प्रबंधन का बयान आया कि महेश अस्पताल से छुपकर कहीं भाग गया है। अब जब महेश के परिजन कुछ सख्त हुए तो अस्पताल की मोर्चरी में रखे हुए शब्दो में ही 7 दिन बाद महेश का शव बरामद हुआ मोर्चरी में रखे शवों में से ही एक शब्द की महेश के रूप में पहचान हुई।

आखिर क्यों नहीं संभल रहे हालात !

शासन द्वारा कड़ी चेतावनी देने के बावजूद भी हालात बिल्कुल भी हालात नहीं बदल रहे हैं स्थिति जस  की तस बनी हुई है। प्रदेश के बड़े शहरों के अस्पतालों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। कोरोना संक्रमित मरीज को लेकर प्रदेश के लगभग सभी प्राइवेट अस्पताल किसी भी प्रकार से संजीदा नहीं हैं। इनका मकसद सिर्फ पैसे कमाना है।

आदेश के बाद भी अभी तक एक भी कार्यवाही नहीं !

दरअसल प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बैठे-बैठे शासन द्वारा आदेश जारी कर देने के बाद अभी तक किसी भी अस्पताल या उसके प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्यवाही तो छोड़िए कहीं किसी शहर में कोई FIR तक दर्ज नहीं हुई है। पिछले काफी समय से लगभग हर बड़े शहर के किसी ने किसी अस्पताल के खिलाफ शिकायतें स्थानीय शासन से लेकर लखनऊ में शासन तक भी गूंजी हैं लेकिन, किसी भी मामले में किसी भी तरीके की कोई कार्यवाही अभी तक नहीं होने के चलते ही अस्पतालों का रवैया मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हुए पैसे कमाने वाला बना हुआ है। इस तरह के सभी मामलों को लेकर प्रदेश में योगी सरकार की छवि को भी धक्का लग रहा है। 



2 दिन पहले ही नोएडा में कार में महिला ने तोड़ा था दम !

प्रदेश के शासन द्वारा मात्र दिशा-निर्देश देने और शिकायत मिलने के बावजूद, किसी तरह की कोई कार्यवाही ना होने के ढुलमुल रवैया के चलते ही अस्पताल प्रबंधन अपनी मनमानी करते हुए लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। अभी 2 दिन पहले ही नोएडा के एक अस्पताल के बाहर एक महिला ने 3 घंटे तक अपनी कार में तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उस महिला को भर्ती करने की जहमत नहीं उठाई। इस मामले में भी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्यवाही अभी तक नहीं हुई है। इसी तरह मुरादाबाद में ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई मौतों का मामला भी सिर्फ जांच तक सीमित होकर रह गया है। 

इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामलो में कार्यवाही नहीं !

मेरठ और मुरादाबाद में रेमीडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले गिरोह ने पूछताछ में कुछ अस्पतालों से जुड़े होने की बात कही लेकिन अभी तक उन अस्पतालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है। लोगों का मानना है कि प्रदेश के 24 बड़े अस्पतालों के खिलाफ यदि शासन द्वारा कोई कार्यवाही अब तक की जाती तो प्रदेश के बाकी अस्पताल लौंग का रवैया थोड़ा सा सुधार सकता था लेकिन किसी भी मामले में अभी तक कोई सख्त कार्रवाई के ना होने से प्रदेश के अधिकतर बड़े अस्पतालों के प्रबंधन अपनी मनमानी पर तुले हुए हैं।

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