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पंजाब कांग्रेस की कमान अब सिद्धू के हाथ में : राजस्थान में भी दिखेगा 'पंजाब मॉडल' का असर !!

by Khabar7 - 19-Jul-2021 | 13:08:54
  पंजाब कांग्रेस की कमान अब सिद्धू के हाथ में : राजस्थान में भी दिखेगा 'पंजाब मॉडल' का असर !!

19 जुलाई 2021,

हाईलाइट्स -

कैप्टन लगातार पार्टी हाईकमान को अनदेखा करते रहे !

अमरिंदर के किसी भी पैंतरे के आगे नहीं झुका हाईकमान !

सिद्धू को नई जिम्मेदारी का श्रेय प्रियंका गांधी के नाम !

पंजाब !!

पंजाब में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर नवजोत सिंह सिद्धू की नियुक्ति का कांग्रेस आलाकमान ने जो साहसिक फैसला किया है। इस फैसले की गूंज दूर-दूर तक  कांग्रेस नीत सभी राज्यों तक पहुंचेगी। इस निर्णय से गांधी परिवार ने पार्टी हाईकमान के रूप में अपने अस्तित्व को फिर से सर्वोच्च साबित किया है, निश्चित रूप से सोनिया गांधी के इस साहसिक फैसले के पीछे राहुल और प्रियंका गांधी ही है।

सोनिया गांधी का कांग्रेस आलाकमान के रूप में जो सर्वोच्च पद लगातार चुनावी हार के कारण काफी कमजोर पड़ता नजर आ रहा था। इस फैसले के बाद उस पद की प्रतिष्ठा फिर ऊंचाइयों तक पहुंचती दिख रही है।

सिद्धू की नियुक्ति से पड़ेगा गहलोत पर असर !

पंजाब राज्य के लिए लिए गए इस फैसले का असर या यूं कहें कि इस 'पंजाब मॉडल' का असर सिर्फ पंजाब में ही नहीं, बल्कि राजस्थान में भी जल्दी ही दिखाई देगा जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सचिन पायलट से चली आ रही खींचतान को अनदेखा करते आ रहे हैं, और तो और वह राहुल और प्रियंका के सुझावों को भी अभी तक दरकिनार कर रहे थे, जो वह अब नहीं कर पाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, जल्दी ही सचिन पायलट भी सिद्धू की तरह अपने राज्य राजस्थान के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जा सकते हैं।
 
सिद्धू की नियुक्ति का श्रेय प्रियंका को !

इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि पार्टी में अगर प्रियंका गांधी के फैसलों का असर बढ़ता हुआ नजर आता है, तो कांग्रेस में प्रशांत किशोर और कमलनाथ की बड़ी भागीदारी भी देखने को मिल सकती है। ऐसा इसलिए भी समझा जा रहा है क्योंकि, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नाराजगी के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब की कमान देने के फैसले का श्रेय पार्टी के अंदर प्रियंका गांधी को ही दिया जा रहा है। कैप्टन अमरिंदर ने अपने विरोधी सिद्धू की ताजपोशी रोकने की हर मुमकिन कोशिश की, हर पैंतरा अपनाया लेकिन गांधी परिवार ने अपना मन नहीं बदला।

 कैप्टन के अपने तरीके ने ही उनके लिए समस्याएं पैदा कर दी  !

दरअसल, प्रियंका गांधी को ये फीडबैक मिला था कि आम आदमी पार्टी सिद्धू को लेकर ज्यादा संजीदा नहीं है, वो सिर्फ सिद्धू को कांग्रेस के एक बागी के रूप में देखना चाहती है और चुनाव में फायदा उठाना चाहती है. इसमें कोई शक नहीं है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह एक सम्मानित नेता हैं. वो एक बेहतर पूर्व आर्मी कैप्टन के साथ अच्छे इतिहासकार भी हैं लेकिन पार्टी के आंतरिक मामलों में वो थोड़ा अलग नजर आए। उनके अपने तरीके ने ही उनके लिए समस्याएं पैदा कर दी हैं और ये ऐसे वक्त में हुआ है जब वो 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगे हैं।

राहुल और प्रियंका चाहते है, युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाना  ! 

दरअसल पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ मिलकर सिद्धू को कमजोर करने की कैप्टन अमरिंदर की योजना से सोनिया गांधी को भलीभांति यह समझ में आ गया कि अभी इस वक्त सिद्धू को अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो पूरी पार्टी में गलत संदेश जाएगा और हर राज्य के वरिष्ठ कांग्रेसी अपनी मनमानी के लिए इसी प्रकार का रास्ता अपनाना शुरू कर देंगे। उधर राहुल और प्रियंका गांधी का भी यह मानना है कि, आने वाले वक्त में पार्टी को अपने वरिष्ठ दिग्गजों की देखरेख में ही पार्टी की युवा पीढ़ी को आगे बढ़ा कर पार्टी को मजबूत किया जा सकता है।

हाईकमान को इग्नोर करते रहे कैप्टन !

दो महीने पहले प्रियंका गांधी ने चंडीगढ़ में अपना दूत भेजकर पंजाब के सियासी हालात पर चर्चा करने का जो संदेश भिजवाया था, उसे कैप्टन अमरिंदर ने दरकिनार कर दिया. कैप्टन ने पार्टी हाईकमान के इस दूत को न सिर्फ 48 घंटे तक इंतजार कराया बल्कि उन्हें बिना किसी संदेश लिए ही वापस दिल्ली कूच करना पड़ा. कांग्रेस की परंपरा के लिहाज से कैप्टन अमरिंदर के इस रवैये को अगर ईशनिंदा न भी कहा जाए तो ये एक तरीके की अवहेलना तो थी ही।

मल्लिकार्जुन, अग्रवाल और रावत भी थे, सिद्धू के पक्ष में !

इसके अलावा भी कैप्टन गुट की तरफ से कुछ ऐसे चीजें की गईं जो उनके खिलाफ ही गईं। जब मल्लिकार्जुन खड़गे, हरीश रावत और जेके अग्रवाल के रूप में कांग्रेस का एक पैनल बनाया गया कांग्रेस आलाकमान द्वारा गठित इस 3 सदस्यीय पैनल को भी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मैं हल्के में लिया, पैनल द्वारा जब कैप्टन से चुनावी तैयारियों को लेकर उनकी राय मांगी गई तो उनके कुछ करीबी और समर्थक वरिष्ठता की दुहाई देते रहे। यहां तक कि इस बात को 79 साल के कैप्टन अमरिंदर की समझ पर सवाल के रूप में पेश किया गया।

कांग्रेस पैनल की बात भी नहीं मानी !

इस सबके बीच, तीन सदस्यीय कमेटी ने 18 बिंदुओं की सिफारिश रिपोर्ट जमा करा दी। इस कमेटी ने कैप्टन अमरिंदर से सिद्धू को चुनावी तैयारियों में लगाने और 'सुटेबल' पद देने की बात कही  बाजवूद इसके कैप्टन अमरिंदर टाल-मटोल करते रहे, जबकि सिद्धू खुद को राहुल और प्रियंका की च्वाइस के रूप में सफलतापूर्वक पेश करते रहे।

फिलहाल, पार्टी हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस का रास्ता तय कर दिया है। अब ये देखना होगा कि, कैप्टन अमरिंदर सिद्धू के साथ कैसे पेश आते हैं और सिद्धू कैसे कैप्टन को साधते हैं। क्योंकि अगर कैप्टन अमरिंदर बगावत करते हैं तो कांग्रेस और प्रियंका की जो सोच अभी अच्छी नजर आ रही है वो अस्तित्व बचाने की एक गंभीर लड़ाई बन जाएगी।

बाजवा और मनीष तिवारी को विश्वास में लिया  !

सभी जानते हैं कि, प्रियंका समेत गांधी परिवार कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रति सहानुभूति रखता है और उनके प्रति काफी नरम भी रहा है, वरना सिद्धू की ताजपोशी में इतना समय नहीं लगता। गांधी परिवार की नजर सांसद प्रताप सिंह बाजवा और मनीष तिवारी पर भी है, जो सिद्धू से फिलहाल खुश नहीं हैं।

इन दोनों को इस वक्त यह समझा दिया गया है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की वापसी के लिए सिद्धू का पार्टी  से जुड़े रहना ही नहीं, वरन पूरे मनोयोग से आगे बढ़कर चुनावी प्रक्रिया में गंभीरता से जुटना अति आवश्यक है उन्हें लगातार ये बताया जा रहा है कि, सभी फैसले सिर्फ एक चीज को ध्यान में रखकर लिए गए हैं कि कैसे कांग्रेस पंजाब में अकाली, बीजेपी और आप को हराकर फिर से सत्ता में वापसी करे।

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