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कोरोना : दूसरी लहर में देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य कैसे हो गया पस्त ?

by Khabar7 - 07-May-2021 | 16:28:00
 कोरोना : दूसरी लहर में देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य कैसे हो गया पस्त ?

07 मई 2021,

हाईलाइट्स -

उत्तर प्रदेश से लगातार आ रही अव्यवस्था की ख़बरें !

पहली लहर में बुरी नहीं थी उत्तर प्रदेश की हालत !

लखनऊ, मुरादाबाद जैसे शहरों में जांच केंद्रों पर भीड़ !

लखनऊ !!

भारत में कोविड-19 की दूसरी ख़तरनाक लहर चल रही है। इस कोरोना वायरस सुनामी के बीच भारत का सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश से लगातार अव्यवस्था की ख़बरें आ रही हैं। प्रशासन के हालात नियंत्रण में होने के दावे के बावजूद लोगों की परेशानी दिन प्रतिदिन बजाए कम होने के बढ़ती ही जा रही है।

कंवल जीत सिंह के 58 वर्षीय पिता निरंजन पाल सिंह की शुक्रवार को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस में मौत हो गई। बेड की कमी के कारण उन्हें चार अस्पतालों से लौटा दिया गया था। कानपुर में अपने घर से उन्होंने कुछ मीडिया कर्मियों को फोन पर बताया, "यह मेरे लिए बहुत दिल दुखाने वाला दिन था। मुझे भरोसा है कि, य​दि उन्हें समय पर इलाज मिल जाता तो वह बच जाते। लेकिन पुलिस, स्वास्थ्य प्रशासन या सरकार ने किसी ने भी हमारी मदद नहीं की।"

कोरोना की लहर में डूबता जा रहा राज्य !

पिछले साल इस महामारी के शुरू होने के बाद से कुल 8,51,620 लोगों के संक्रमण और 9,830 मौतों के साथ, उत्तर प्रदेश की हालत पहली लहर के बहुत बुरी नहीं थी। लेकिन दूसरी लहर ने इसे यह राज्य कोरोना की लहर में डूबता जा रहा है।

प्रदेश के आला अधिकारियों का अभी तक रेट हटाया बयान सामने आ रहा है कि हालात नियंत्रण में है। लेकिन राजधानी लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, मुरादाबाद, मेरठ और इलाहाबाद जैसे अन्य प्रमुख शहरों में जांच केंद्रों पर जुट रही भीड़, अस्पतालों से लौटाए जा रहे मरीज और श्मशान घाट पर लगातार चौबीसों घंटे जल रही चिताओं की दिल और दिमाग को परेशान करती तस्वीरें बता रही हैं कि हालात रोजाना कितने बिगड़ रहे हैं।

सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य सबसे ज्यादा खतरे में !

जैसा कि आप जानते ही हैं कि, 24 करोड़ की आबादी के साथ उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। हर छठा भारतीय इस राज्य का निवासी है. य​दि यह अलग देश होता तो यह चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया के बाद दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा देश होता जो पाकिस्तान और ब्राजील से भी बड़ा होता। बावजूद इतनी बड़ी आबादी के पिछली कोरोना लहर के दौरान उत्तर प्रदेश में हालात इतने नहीं बिगड़े थे जितने इस बार दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं।

आपको बता दें प्रदेश की कोरोना की सुनामी के बीच यह स्थिति तो तब है जब उत्तर प्रदेश राजनीतिक लिहाज़ से भी देश का सबसे अहम राज्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यही के बनारस संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं बनारस की जनता का अपना एक अलग ही दुख है बनारस के लोगों का कहना है कि उनके सांसद यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 बार बंगाल का दौरा किया लेकिन कोरोना दूसरी लहर के बीच उन्हें एक बार भी बनारस की याद नहीं आई और ना ही वह बनारस आए।

इस राज्य में अभी कोरोना के दो लाख 20 हज़ार से ज्यादा सक्रिय मामले हैं। और मामला अभी रूका नहीं है संक्रमण के हजारों मामले रोज़ सामने आ रहे हैं। हालांकि माना जाता है कि संक्रमित लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है। 

इन कारणों ने राज्य के ख़राब स्वास्थ्य ढांचे को सुर्ख़ियों में ला दिया है। मरीज़ों में राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उनकी कैबिनेट के कई सहयोगी, दर्जनों सरकारी अधिकारी और सैकड़ों डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं। और तो और सुनामी की दूसरी लहर के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी टीम-11 को हटाकर नई टीम-9 गठित कर दी है देखना यह है की नई टीम-11 की जगह, टीम-9 अपने काम को किस तरह अंजाम देती है। पिछले कुछ दिनों में राज्य के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें शासन प्रशासन की लापरवाही साफ दिखाई देती है।

लोगों ने मीडिया से साझा किया अपना दुख !

कानपुर के पत्रकार द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में सरकारी लाला लाजपत राय अस्पताल की पार्किंग में एक मरीज़ जमीन पर पड़ा हुआ दिखा. थोड़ी दूर पर एक बुज़ुर्ग शख़्स एक बेंच पर बैठा हुआ है। वे दोनों लोग कोरोना सं​क्रमित हैं पर अस्पताल में उन्हें भर्ती करने के लिए कोई बेड नहीं है।

सरकार के ही कांशीराम अस्पताल के बाहर, एक युवती ने रोते हुए कहा कि दो अस्पतालों ने उसकी बीमार माँ को भर्ती करने से मना कर दिया। उस युवती ने लगातार रोते हुए बताया, "वे कह रहे हैं कि उनके पास बेड नहीं है। यदि अस्पताल में बेड नहीं है तो मरीज़ को फर्श पर रखिए पर कम से कम उसका कुछ इलाज तो कीजिए। मुख्यमंत्री कहते हैं कि पर्याप्त बेड है। कृपया मुझे बताएं और दिखाऐं कि बेड कहाँ है? और कृपया मेरी भी माँ का इलाज कीजिए।

राजधानी लखनऊ की स्थिति भी दयनीय !

कार में बैठे और चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगाए सुशील कुमार श्रीवास्तव का मामला भी सोशल मीडिया के जरिये सामने आया है। उन्हें भर्ती कराने के लिए उनका परिवार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भागता रहा। जब तक उन्हें बेड मिला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उनके बेटे का कहना है कि, वे टूट चुके हैं और बात करने की हालत में नहीं हैं। उन्होंने कहा, "आप जानते हैं कि हुआ क्या। वैसे मैं बात करने की हालत में नहीं हूं।"

रिटायर्ड जज रमेश चंद्र के हिंदी में हाथ से लिखे नोट को सैकड़ों लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा किया है. वे कोरोना संक्रमित अपनी पत्नी के शव को घर से ले जाने की अधिकारियों से गुहार लगा रहे थे। लेकिन कोई उनकी सुन नहीं रहा था। उन्होंने इस पत्र में लिखा - "मेरी पत्नी और मैं दोनों कोरोना पॉजिटिव हुए। कल सुबह से, सरकारी हेल्पलाइन नंबरों पर मैंने कम से कम 50 बार कॉल किया. लेकिन कोई भी दवा देने या हमें अस्पताल ले जाने के लिए नहीं आया. प्रशासन की ढिलाई के कारण आज सुबह मेरी पत्नी का निधन हो गया।"

अस्पताल में बेड और मेडिकल स्टोरों पर दवाएं तक नहीं !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में लंबे समय से रह रहीं 70 वर्षीया निर्मला कपूर की बीते गुरुवार को एक अस्पताल में कोरोना से मौत हो गई। उनके बेटे विमल कपूर ने मौज़ूदा हालात को 'भयावह' बताया है। विमल कपूर ने बताया, "मैंने बहुतों को एंबुलेंस में मरते देखा है। अस्पताल मरीज़ों को भगा रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई बेड नहीं है, दवा दुकानदारों के पास कोरोना की दवाइयां नहीं हैं और ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं हैं।"

उन्होंने कहा कि जब वह अपनी मां के शव को श्मशान घाट ले गए, तो घाट पर 'लाशों का ढेर' लगा था. चिता के लिए लकड़ी की कीमत तिगुना हो गई है। दाह-संस्कार के लिए इंतज़ार की अवधि 15-20 मिनट से बढ़कर पांच-छह घंटे तक हो गई है। उन्होंने कहा, "मैंने पहले कभी ऐसा नजारा नहीं देखा था. जहां भी आप देखते हैं, आपको एंबुलेंस और लाशें ही दिखती हैं." मीडिया के अनुसार, श्मशान घाटों पर जलने वाले शवों और कोरोना से मरे लोगों के आंकड़ों में कोई मेल नहीं पाया जा रहा है।

सही तस्वीर सामने आ ही नहीं रही !

कोविड-19 से हुई मौतें और इससे तबाह परिवारों की कहानियों के बीच राज्य में संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। रविवार को राज्य में 30,596 नए मामले दर्ज किए गए जो एक दिन में संक्रमित हुए लोगों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

यहां तक ​​कि विपक्षी नेता और कार्यकर्ता भी कोरोना संक्रमण की सही तस्वीर नहीं बता रहे। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में पर्याप्त टेस्ट न करके और निजी लैब के आंकड़ों को शामिल न करके कोरोना से हुई मौत और इससे संक्रमित हुए लोगों के आंकड़े को कम रखा जा रहा है।

इन सभी के दावों में दम दिखता है। जिन लोगों से मैंने बात की, उनमें से कइयों की जांच नहीं हुई थी तो कइयों के पॉजीटिव होने के बाद भी उनके आंकड़े को राज्य सरकार की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया था। लखनऊ के एक 62 वर्षीय व्यक्ति  की पत्नी के पॉज़िटिव होने की रिपोर्ट उन्हें मिली है। लेकिन राज्य सरकार के रिकॉर्ड में उनका कहीं नाम नहीं मिलाता।

कोरोना से मरने वालों की सूची में नाम शामिल, डेथ सर्टिफिकेट में गायब !

कानपुर के निरंजन पाल सिंह और वाराणसी की निर्मला कपूर दोनों का नाम राज्य में कोरोना महामारी से मारे गए लोगों की सूची में शामिल था। इसके बाद भी उनके डेथ सर्टिफिकेट में कहीं भी कोरोना वायरस का ज़िक्र नहीं मिला। मीडिया ने भी सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इलाहाबाद लखनऊ और वाराणसी के श्मशान घाटों पर जलने वाले शवों और कोरोना से मरे लोगों के सरकारी आंकड़ों में कोई मेल ही नहीं है।

समय रहते करना चाहिए था सरकार को काम !

वाराणसी के एक निजी अस्पताल हेरिटेज हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर मौज़ूदा हालात को 'असाधारण खतरनाक' बताते हैं,  वे कहते हैं, ''स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने का कारण है कि डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय और लैब टेक्नीशियन जैसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता बहुत बीमार हो रहे हैं।

जब दुगना काम करना चाहिए था चौथाई भी नहीं किया !

उन्होंने बताया, "ऐसे समय में जब हमें 200% काम करना चाहिए था  हमने 25% भी पूरा नही किया। ऐसा इसलिए कि, स्वास्थ्य क्षेत्र पूरी तरह मानव शक्ति पर निर्भर है।" हालांकि, दूसरी लहर का अनुमान लगाने में विफल रहने के लिए आलोचक राज्य और केंद्र सरकार को जिम्मेदार मानते हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, सितंबर और फरवरी के बीच कुछ नहीं किया गया, जबकि उस समय स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचों को मजबूत बनाया जा सकता था। राज्य ऑक्सीजन बैंक बनाने के साथ दवाएं जमा कर सकते थे. हालांकि उन्होंने इस मौके को यूं ही जाने दिया। और अब जब वायरस तेज़ी से फैल रहा है तब सब कुछ ठीक होने की उम्मीदें फिलहाल नहीं दिखतीं।

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