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UP : सरकार छुपा रही आंकड़े, कोरोना टेस्ट के 10 दिन बाद भी लोग कर रहे रिपोर्टों का इंतजार !!

by Khabar7 - 05-May-2021 | 13:03:30
UP : सरकार छुपा रही आंकड़े, कोरोना टेस्ट के 10 दिन बाद भी लोग कर रहे रिपोर्टों का इंतजार !!

05 मई 2021,

हाईलाइट्स -

कोरोना रिपोर्ट्स ना आने से मरीजों की घटी संख्या !

आंकड़ों का खेल ही प्रतीत होती है !

हजारों लोग 10 दिन से जांच रिपोर्ट के इंतजार में !

लखनऊ/कानपुर !!

प्रदेश में ऑक्सीजन और बेड की किल्लत के बीच कई शहरों के लोग कोरोना की जांच रिपोर्ट में लेटलतीफी से मरणासन्न हो रहे हैं। दरअसल RTPCR जांच के लिए सैंपल देने के 10 दिन बाद भी लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि वह कोरोना संक्रमित हैं या नहीं।

दूसरी तरफ ऐसे लोग जिनमें कोरोना संक्रमण के कुछ लक्षण हैं भी तो रिपोर्ट के अभाव में डॉक्टरों ने इलाज करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में वे मेडिकल स्टोर से अपनी आधी अधूरी जानकारी के अनुसार दवा खरीद कर खा रहे हैं। सिस्टम की इस नाकामी से कोरोना संक्रमित मरीजों की पिछले 3 दिनों में जो संख्या घटती हुई दिखाई दे रही है वह जांच रिपोर्ट में देरी के चलते ही प्रतीत होती है। प्रदेश के लखनऊ कानपुर सहित हर बड़े शहर के हजारों लोग पिछले 10 दिन से जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं।

9 दिन बाद भी इनमें से किसी की रिपोर्ट नहीं आई !

इस मामले में आपको कानपुर महानगर का हाल बताते हैं यहां कम से कम 1000 परिवारों के हजारों लोग अपनी जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं शहर के अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। किदवईनगर के नगरीय स्वास्थ्य केंद्र सैंपल कलेक्शन सेंटर की हालत सबसे खराब है। यहां 26 मई को RTPCR जांच के लिए 50 सैंपल लिए गए थे। नौ दिन बाद भी इनमें से किसी की रिपोर्ट नहीं आई।

रोजाना लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर लगाकर यह पता करने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर उनके सैंपल का क्या हुआ? इस बीच इलाज न मिलने से कई मरीजों की हालत गंभीर हो चली है। किसी की मौत भी हो गई हो तो इससे इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, शहर के छोटे-बड़े अस्पतालों में इलाज मिलना मुश्किल है ही, झोलाछाप भी बिना जांच रिपोर्ट के हाथ नहीं लगा रहे हैं।

केस 1 -

कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 22 अप्रैल बारासिरोही स्थित सरकारी अस्पताल में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था। तबीयत खराब होने पर उन्होंने कोरोना के संदेह में सैंपल दिया था। उनके मुताबिक, तीन मई की शाम तक रिपोर्ट नहीं आई थी। इससे पहले कई बार उन्होंने अस्पताल से संपर्क कर रिपोर्ट के बारे में पूछा पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर निजी लैब में जांच करा ली। रिपोर्ट निगेटिव आई।

केस 2 -

कानपुर के ही बाबूपुरवा निवासी बुखार और खांसी से पीड़ित युवती ने 26 अप्रैल को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, किदवईनगर में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था। चार मई की दोपहर तक युवती की रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई थी। नौ दिन बीत गए, लेकिन युवती रिपोर्ट के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पा रही है। तीन दिन से वह स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर लगाकर पता करने की कोशिश कर रही है कि आखिर उसकी जांच का क्या हुआ। 

केस 3 -

कानपुर के किदवईनगर के एक युवक ने भी 27 अप्रैल को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, किदवईनगर में कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया था। पूरा परिवार खांसी, बुखार और बदन दर्द से पीड़ित है। इस परिवार को भी आठ दिन बाद तक यह पता नहीं चला है कि वे संक्रमित हैं या नहीं। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर अंदाजे से खा रहे हैं, क्योंकि डॉक्टरों ने बिना जांच रिपोर्ट के इलाज करने से इनकार कर दिया है। वह भी रिपोर्ट के लिए स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर काट रहा है।

बाद में लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट आ गई !

जागेश्वर अस्पताल, गोविंदनगर में जिन लोगों ने 30 अप्रैल को सैंपल दिया, उनकी जांच रिपोर्ट तीन मई तक आ गई। लेकिन, अन्य केंद्रों में जिन लोगों ने 25 से 28 के बीच सैंपल दिया, उनमें से कई की रिपोर्ट पोर्टल पर चार मई तक अपडेट नहीं हुई। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी इसमें भी भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। 

संक्रमित मरीजों की संख्या कम दिखाने का खेल !

जांचों को लेकर जो हालात बताए जा रहे हैं, उससे आशंका है कि संक्रमित मरीजों की संख्या कम दिखाने के लिए यह खेल किया जा रहा है। दरअसल जिस व्यक्ति ने सैंपल दिया, उसके अलावा किसी को नहीं पता होता कि उसकी रिपोर्ट आई या नहीं? जिसकी नहीं आती, वो कुछ दिन बाद फिर से जांच करा लेता है। इसमें निगेटिव आने पर आंकड़ा जारी कर दिया जाता है और पॉजिटिव का रोक लिया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में डेरी भी की जा रही है जिससे संक्रमित आंकड़े ज्यादा भयावह न लगें। 

26 अप्रैल को जितने भी सैंपल जांच के लिए भेजे गए, उनमें से किसी की रिपोर्ट नहीं आई है। इस मामले में किदवई नगर स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ जया का कहना है कि हमारा काम सैंपल लेकर उसे उर्सला तक पहुंचा देना होता है। सैंपल जिस दिन लिया जाता है, उसी दिन शाम तक उर्सला में रिसीव करा दिया जाता है।

रोजाना 3 हजार रिपोर्ट, सैंपल 5 हजार से ज्यादा !

उधर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्राचार्य - डॉ. आरबी कमल का कहना है कि, कोविड लैब के प्रभारी और कर्मचारी भी संक्रमित हैं। दूसरे स्टाफ से जांचें कराई जा रही हैं। इससे समय पर न तो जांचें हो पा रही हैं और न ही डाटा फीड हो पा रहा है। रोजाना करीब तीन हजार सैंपल की रिपोर्ट जारी कर रहे हैं, लेकिन सैंपल पांच हजार से ज्यादा आ रहे हैं।

कोई कुछ भी कहे लेकिन इतना तो तय है कि कोविड-19 की जांच के नतीजों में इतनी ज्यादा देरी के पीछे कोई ना कोई खेल जरूर खेला जा रहा है और हो ना हो यह पॉजिटिव रिपोर्ट ओं में कमी लाने की कोशिश हो सकती है हालांकि कल शीर्ष अदालत ने भी कहा था रेत में सिर छुपाने से मुसीबत टल नहीं जाती।

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