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यूपी में सपा और आप के बीच बढ़ रही नजदीकियां, आखिर क्या है इसकी वजह ?

by Khabar7 - 19-Jul-2021 | 14:09:21
यूपी में सपा और आप के बीच बढ़ रही नजदीकियां, आखिर क्या है इसकी वजह ?

19 जुलाई 2021,

हाईलाइट्स -

संजय सिंह ने की थी अखिलेश यादव की तारीफ !

चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच नजदीकियों की क्या है वजह ?

अखिलेश यादव को 'आप' से क्या होगा फायदा ?

लखनऊ !!

29 जून को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और अखिलेश यादव के फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाले उनके चाचा रामगोपाल यादव का जन्म दिन था। आप के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने भी उन्हें बधाई दी। बधाई ने उतना नहीं चौंकाया, जितना बधाई देने के लिए चुने गए शब्दों ने चौंकाया- 'राज्य सभा में अपने ओजस्वी वक्तव्यों से विपक्षियों को लाजवाब करने वाले, सौम्य स्वभाव के धनी आदरणीय श्री राम गोपाल यादव जी को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं।'

इसके बाद एक जुलाई को अखिलेश यादव के जन्मदिन पर संजय सिंह ने उन्हें उनकी सहजता और सौम्यता के कारण लोकप्रिय बताया और तीन जुलाई को उनसे मुलाकात करने पहुंच गए। इस मुलाकात पर पर्दा डालने की कोशिश नहीं हुई। पहले अखिलेश यादव ने संजय सिंह के साथ अपने फोटो को ट्वीट किया।

संजय सिंह ने बांधे अखिलेश की तारीफों के पुल !

संजय सिंह ने उस फोटो को री-ट्वीट करते हुए लिखा, 'चुनावी व्यस्तता के बावजूद मुलाक़ात का समय देने के लिए आपका अत्यंत आभार। भाजपा की दमनकारी नीतियों और जिला पंचायत के चुनाव में लोकतंत्र को लूटतंत्र में परिवर्तित करने के मुद्दे पर भी गहन चर्चा हुई।'

जब यूपी के CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्हें ओवैसी की चुनौती स्वीकार है तो संजय सिंह का बयान आया है कि 'योगी ओवैसी की चुनौती स्वीकार कर रहे हैं जिसका यूपी में एक भी विधायक नहीं है, उस पार्टी की चुनौती स्वीकार नहीं कर रहे हैं, जिसके पांच सांसद और 50 विधायक हैं।' पांच सांसद और 50 विधायक यूपी में समाजवादी पार्टी के ही हैं।

राजनीति में बिना मकसद के कुछ नहीं होता !

यही घटनाक्रम बताता है कि कहीं न कहीं यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच नजदीकी बढ़ रही हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो इतने संवेदनशील समय में, जबकि राज्य में विधानसभा चुनाव के महज सात महीने रह गए हैं, मेल-मुलाकात और बधाई के लेन-देन का कोई पार्टी जोखिम नहीं लेना चाहती। राजनीति में हर एक शब्द के और हर एक कदम के निहितार्थ होते हैं। बिना मकसद कहीं भी कुछ नहीं होता।

नजदीकी बढ़ने की वजह !

यूपी में समाजवादी पार्टी ने 2017 का विधानसभा का चुनाव कांग्रेस के साथ लड़ा लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं आए। 2019 का लोकसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी के साथ लड़ा, वह भी नहीं चल सका। अखिलेश यादव ने साफ कह दिया है कि भविष्य में इन दोनों पार्टियों से कोई भी गठबंधन नहीं होगा। लेकिन चुनावी समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए पार्टियों को अन्य दलों के साथ गठबंधन जरूरी हो जाता है।

300+ विधायकों के साथ राज्य में सरकार चला रही भाजपा को भी अपने चुनावी समीकरण दुरुस्त करने को छोटे-छोटे दलों से बात करनी ही पड़ रही है। यह जानते हुए भी कि आम आदमी पार्टी का अभी यूपी में कोई बहुत मजबूत जनाधार तैयार नहीं हुआ है अखिलेश यादव को आम आदमी पार्टी इसलिए सूट कर रही है, क्योंकि इसका अपर कास्ट चेहरा है।

AAP से अखिलेश को क्या मिल सकती है मदद ?

यूपी में भाजपा के मजबूत होने के बाद समाजवादी पार्टी से अपर कास्ट की जो दूरी बढ़ी है और समाजवादी पार्टी को सिर्फ यादव और मुसलमानों की पार्टी साबित करने की कोशिश शुरू हुई है, उसमें आम आदमी पार्टी से उसको मदद मिल सकती है। दूसरा, अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा नाम तो हैं ही। यूपी में भाजपा के मंच पर मोदी और शाह दिखेंगे तो अखिलेश यादव को भी अपने मंच पर भी कुछ बड़े कद वाले नेताओं का साथ तो चाहिए ही होगा।

तीसरी बात यह कि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के लिए समाजवादी पार्टी को 50: 50 के अनुपात में सीट देनी पड़ गई थी। आम आदमी पार्टी के साथ ऐसा नहीं होने वाला। उसको बहुत ज्यादा सीटों की अपेक्षा नहीं होगी। उधर आम आदमी पार्टी को भी यूपी में समाजवादी पार्टी का साथ इसलिए भाता है कि राज्य की विधानसभा में एंट्री करनी है तो शुरुआत में उसे किसी मजबूत पार्टी का साथ तो चाहिए ही होगा। आज की तारीख में स्थिति आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ती है तो उसकी जीत की सम्भावना को बहुत ज्यादा मानकर नहीं चला जा सकता है। वैसे अभी दोनों पार्टियां यह स्वीकार नहीं कर रही हैं कि उनके बीच कोई गठबंधन होने जा रहा है।

संजय सिंह फैक्टर भी महत्वपूर्ण !

समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती नजदीकी की एक वजह संजय सिंह भी हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह यूपी के सुलतानपुर जिले के ही रहने वाले हैं। एक वक्त मुलायम सिंह यादव उन्हें बहुत पसंद करते थे, जब आम आदमी पार्टी का गठन नहीं हुआ था और जनआंदोलन के जरिए संजय सिंह यूपी में अपनी सक्रियता बनाए रखते थे।

आम आदमी पार्टी के गठन के बाद संजय सिंह की राजनीति का केंद्र दिल्ली शिफ्ट हो गया था। आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सदस्य और यूपी का प्रभारी बनने के बाद वह यूपी की पॉलिटिक्स में फिर लौटे हैं और इस वक्त राज्य में योगी सरकार पर निशाना साधने में सबसे अव्वल हैं।

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