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आप भी जान लीजिये वो सच, जिसका शायद आपको ज्ञान ही ना हो !!

by Khabar7 - 21-Jul-2021 | 12:19:14
आप भी जान लीजिये वो सच, जिसका शायद आपको ज्ञान ही ना हो !!

21 जुलाई 2021


नई दिल्ली से खबर 7 के लिए....

वरिष्ठ पत्रकार राज भारद्वाज की कलम से !!


मैं भी पता नहीं... किस मुगालते में जी रहा था......

दरअसल कल मुझे अपने जन्म लेने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा सच पता चला। भईया मेरी तो आंखें ही खुल गई !इस देश का आज तक का सबसे बड़ा सच जिससे मैं अभी तक अनजान था और आप में से भी बहुत से लोग शायद इस सच से अनजान ही होंगे?

आपकी आंखों पर भी शायद पर्दा पड़ा होगा। फिर भी मैं एक बार कोशिश कर लेता हूं, हो सकता है कि, आपकी आंखों से झूठ का पर्दा हट जाए और आप भी सच रूपी ज्ञान को प्राप्त कर लें।

अब आपको बताता हूँ आज और अब तक का सबसे बड़ा सच जो सौभाग्य से मुझे कल शाम ही ज्ञात हुआ ......

आज और अब तक का सबसे बड़ा सच यह है कि,

"2021 के अप्रैल व मई महीने में कोरोना काल के समय ऑक्सीजन की कमी से पूरे देश में कहीं भी किसी अस्पताल में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई"।

मेरी आंखें खोलने वाला यह सबसे बड़ा सच कल अचानक से मुझे उस वक़्त पता चला जब मैंने टीवी ऑन कर लिया और सही समय पर मैंने रिमोट भी उठा लिया। सोने पर सुहागा यह कि, मेरी उंगलियों ने भी न्यूज़ चैनल के लिए रिमोट के बटन दबाते हुए तुरंत एक न्यूज़ चैनल मेरी आंखों के सामने ला दिया। वरना मैं तो भैया कल इस सबसे बड़े सच से अनजान ही रह जाता।

यह अलग बात है कि, जिम्मेदार और समझदार प्रिंट मीडिया से मुझे यह सच का ज्ञान आज सुबह प्राप्त होता, लेकिन इसके लिए भी प्रिंट मीडिया मेरी परीक्षा लेने को तैयार था। क्योंकि जो समाचार पत्र मेरे घर पर आता है उसमें कहीं भी मुख्य पृष्ठों पर  खास खबरों के रूप में इसका जिक्र नहीं है अंदर के पृष्ठों पर एक छोटे कॉलम में उक्त सच को मेरे जैसे समर्पित पाठक से  छुपाने की कोशिश की गई है। खैर छोड़िए मुझे क्या मुझे तो ईश्वर की कृपा से कल शाम को ही सत्य का ज्ञान हो गया।

दरअसल उस चैनल पर बताया जा रहा था कि, नवनियुक्त स्वास्थ्य राज्यमंत्री रूपी पांडव दल के ओहदेदार ने कल ही राज्यसभा में लिखित में यह सच सबके सामने रखा। मैं भी कितना अज्ञानी था, जो कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष और अनेकों गैर जिम्मेदाराना चिकित्सकों और अबुद्धिजीवियों रूपी कौरवो की बात पर विश्वास कर बैठा, जो जोर-जोर से चिल्ला-चिल्ला कर झूठ बोल रहे थे कि, ऑक्सीजन की कमी से हजारों जाने चली गई। 

दरअसल इसमें मेरा भी कोई कसूर नहीं है मुझे भी इतने बड़े झूठ पर इसलिए विश्वास हो गया। क्योंकि उस समय देश में मुंबई, दिल्ली सहित पूरे राजधानी क्षेत्र के बत्रा अस्पताल सरीखे चिकित्सालयों और आगरा, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ, कानपुर और लखनऊ के साथ-साथ देश के सभी राज्यों के बड़े महानगरों में कई अस्पताल के गैर जिम्मेदार डॉक्टर बिना वजह गला फाड़कर चिल्ला रहे थे रहे थे कि, "ऑक्सीजन चाहिए, ऑक्सीजन चाहिए"।

डॉक्टरों की मिली-भगत से विपक्ष रूपी कौरवों ने इस वर्ष अप्रैल-मई के माह में कोरोन-काल के समय में यह भ्रम फैला दिया कि,ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई थी। और मैं अज्ञानी भी इस झूठ की चपेट में आ गया। और इसे सत्य समझ बैठा वह तो भला हो हमारी कर्मठ स्वास्थ्य राज्यमंत्री का जिन्होंने मुझे सत्य का ज्ञान कराया।

हमेशा की तरह खास बात यह है कि, भारती पवार रूपी वीर योद्धा को पीएमओ कार्यालय द्वारा कोई मदद नहीं दी गई। आप यह ना समझे कि, उन्हें पीएमओ कार्यालय द्वारा कुछ बताया गया है। उन्हें कागज का यह तीर तैयार करके भी नहीं दिया गया। उन्होंने अपने आप से बहुत बड़ी तपस्या करके देवताओं से इस कागज के तीर को प्राप्त किया है। बिना किसी मदद के, महान शूरवीर योद्धा पवार ने कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष और उनके चेले-चौपाटो की साजिश की मात्र एक ड्राफ्ट-पत्र रूपी कागज के तीर द्वारा धज्जियां उड़ा दी।

इस कागज़ के तीर की नोक पर लिखा गया कि, सरकार ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर पूरी तरीके से संजीदा थी और कोरोना काल के समय में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को उनकी जरूरत से दोगुनी ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरे पारदर्शिता के साथ की। तीर पर नो कि इस तेज धार ने विपक्ष रूपी कौरवों और विपक्ष को समर्थन दे रही जनता रूपी सेना के झूठ को चीर-चीर कर दिया।

नवनियुक्त स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती पवार को उनके अदम्य साहस और समझदारी के लिए शत शत नमन !!

मेरा तो कहना है संपूर्ण भारत की जनता को भी इन स्वास्थ्य मंत्री को नमन करना चाहिए।

स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती पवार का यह ड्राफ्ट वाकई काबिले-तारीफ है। विपक्ष रूपी कौरवों के साजिशन व अनर्गल आरोपों को स्वस्थ राज्यमंत्री ने मात्र एक कागज के तीर से "जिसमें अर्जुन के बाण सरीखी शक्ति निहित है" धराशाई कर दिया। बेचारे विपक्ष रूपी कौरवों को कहां पता कि, इस समय के भाजपाई पांडवों के पास एक नहीं अनेकों अर्जुन है जिन्हें इस प्रकार के ड्राफ्ट लेटर को राज्यसभा में पेश करने में महारत हासिल है।

इससे पहले विपक्ष रूपी कौरवों द्वारा रचे गए चक्रव्यू में डॉक्टर हर्षवर्धन रूपी अभिमन्यु अपनी बलि दे बैठे। उन्हें चक्रव्यू में घुसने का मार्ग तो पता था और वह कुछ भी गए लेकिन चक्रव्यूह को भेदकर सकुशल वापस बाहर लाने में मददगार कागज रूपी तीर का उन्हें ज्ञान नहीं था।

अरे क्या जरूरत थी अति उत्साह में अपनी बलि दे देने की। सीखिए बिल्कुल नए नवेले योद्धाओं से सीखिए कि किस प्रकार अर्जुन के बाण की शक्ति सरीखे कागज के तीर का इस्तेमाल किया जाता है। हस्तिनापुर राज्यसभा का आयोजन होने से पहले ही ढोल नगाड़ों (प्रेस वार्ता बुलाकर) के साथ कागज का तीर चला देते।

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