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भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी खिलाड़ी की हालत खस्ता, ईंट भट्टे पर काम करके कर रही गुजारा !!

by Khabar7 - 23-May-2021 | 14:27:16
भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी खिलाड़ी की हालत खस्ता, ईंट भट्टे पर काम करके कर रही गुजारा !!

23 मई 2021,

हाईलाइट्स :-

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाडी की हालत खस्ता !

ईट भट्टे पर काम करके कर रही गुजारा !

अंडर-17 में खिलकर बढ़ाया था झारखंड का मान !

उपेक्षा की वजह से हुनर तोड़ता है दम !

धनबाद !!

भारत में बेशुमार खेल प्रतिभाएं हैं। लेकिन इनमें से अधिकतर अपेक्षाओं की शिकार उपेक्षा के चलते ही इनका हुनर दम तोड़ देता है। झारखंड की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी संगीता कुमारी की हालत ये है कि संगीता ईट-भट्टा में काम करने को मजबूर हैं। मेडल जीतने वाली संगीता के साथ भी कई वादे किए गए थे लेकिन वे अभी पूरे नहीं हुए हैं।

दरअसल, संगीता सोरेन धनबाद स्थित बाघामारा बासमुड़ी की रहने वाली हैं। संगीता ईंट भट्ठा में तप कर अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ कर रही हैं। कोरोना काल मे जारी लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले उनके बड़े भाई को भी कोई काम नहीं मिल रहा है, अब परिवार का पूरा बोझ संगीता पर ही है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एकबार ट्वीट कर मदद और सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया था, लेकिन वह अब तक पूरा नहीं हो पाया है।  नतीजन संगीता इस हाल में नौकरी करने  को मजबूर हैं। संगीता के पिता को ठीक से दिखाई नहीं देता, संगीता की मां भी अपनी खिलाड़ी बेटी के साथ ईंट भट्ठा जाती हैं और वहां काम करती हैं। 

संगीता ने साल 2018-19 में अंडर-17 में भूटान और थाईलैंड में हुए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में खेलते हुए झारखंड का मान बढ़ाया था। संगीता ने जीत के साथ ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया था।

संगीता के पिता ने कहा कि उन्हें उमीद थी कि उसकी बेटी फुटबॉल की अच्छी खिलाड़ी है तो सरकार कुछ करेगी, लेकिन कुछ नहीं मिला है। भट्टा में बेटी को काम करना पड़ रहा है।  यहां के विधायक ने भी कोई मदद नहीं की। संगीता कहती हैं कि, परिवार को देखना भी जरूरी है, इसलिए ईंट भट्ठा में दिहाड़ी मजदूरी करती हूं, किसी तरह घर का गुजर बसर चल रहा है।

इन सभी कठिनाइयों के बावजूद संगीता ने अपनी फुटबॉल की प्रैक्टिस नहीं छोड़ी। आज भी वो हर रोज सुबह मैदान में प्रैक्टिस करती हैं। चार महीने पहले सीएम हेमंत सोरेन को ट्वीट कर मदद मांगी थी, जिसपर मुख्यमंत्री द्वारा संज्ञान लेते हुए मदद का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार का कोई मदद प्राप्त नहीं हुई है।

संगीता ने यह भी बताया कि, सही सम्मान नहीं मिलने के कारण ही यहां की खिलाड़ी दूसरे प्रदेश से खेलने चली जाती हैं। हर खिलाड़ी को अच्छा भोजन, के साथ खेल सुविधाओं और  प्रैक्टिसब की जरूरत है, लेकिन यहां की सरकार खिलाड़ियों के प्रति गम्भीर नहीं लगती है, यही कारण हैं कि मेरे जैसे खिलाड़ी मजदूरी कर रहे हैं।

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