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कोरोना : हरिद्वार में श्मशान घाट पर 24 घंटे जल रहीं चिताएं, तपने लगे आस-पास के मकान !!

by Khabar7 - 01-May-2021 | 16:20:21
कोरोना : हरिद्वार में श्मशान घाट पर 24 घंटे जल रहीं चिताएं, तपने लगे आस-पास के मकान !!

01 मई 2021,

हाईलाइट्स -

कनखल-खड़खड़ी के शवदाह गृहों की हालत खराब !

कई लोग मकान बंद कर रिश्तेदारों के यहां चले गए !

रोजाना 20 से 25 शवों का अंतिम संस्कार !

हरिद्वार !!

कोरोना महामारी हर दिन कई लोगों की जान ले रही है। हरिद्वार के श्मशान घाटों पर रोते-बिलखते व PPE किट में अंतिम संस्कार करते मृतकों के परिजनों को देखकर लोग सिहर उठते हैं। श्मशान घाटों में लगातार चिताएं जलने से आसपास के मकान भी तपने लगे हैं। कई लोग तो अपने मकानों में ताला लगाकर रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।
 
जनपद में कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही मौतों का आंकड़ा भी डराने लगा है। आलम यह है कि श्मशान घाटों पर 24 घंटे चिताएं जल रही हैं। कनखल और खड़खड़ी के शवदाह गृहों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। शवदाह गृह के साथ ही आसपास खाली पड़ी जमीनों पर भी अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं।

प्लेटफार्म कम पड़ने से खाली जगहों का इस्तेमाल !

कनखल श्मशान घाट के आसपास कई मकान हैं। लगातार चिताएं जलने से आग की तपिश मकानों तक भी पहुंच रही है। भीषण गर्मी के कारण लोगों का घरों में रहना भारी पड़ रहा है। ऐसे में आसपास रहने वाले कुछ लोग घरों में ताला लगाकर अपने रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं। औसतन रोजाना यहां 20 से 25 शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। प्लेटफार्म कम पड़ने के कारण खाली जगहों का इस्तेमाल हो रहा है।

मृतकों के शव लेकर श्मशान घाट आ रहे परिजन और रिश्तेदार आसपास से गुजरते हैं। ऐसे में बच्चों को संक्रमण न हो जाए, इसके लिए उनके घरों से निकलने पर रोक लगा दी गई है। वहीं, श्मशान घाट में चिताओं से उठने वाली राख, हवा के साथ उड़कर दूर तक पहुंच रही है। ऐसे में लोगों के लिए यह भी एक परेशानी हो रही है कि इस राख से कैसे छुटकारा पाएं। 

बेटी की मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आया !

वहीं, शुक्रवार को कनखल श्मशान घाट पर एक बेटी ने PPE किट पहनकर कोरोना संक्रमित मां के शव को मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। बेटी लगातार मां की सेवा में जुटी थी। बेटी को मुखाग्नि देने के दौरान कई लोग मौजूद रहे, लेकिन कोई उसकी मदद करने के लिए आगे नहीं आया। इसके बाद दो समाजसेवियों ने हाथ बढ़ाया और अंतिम संस्कार पूरा कराया।
 
ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले भेल से रिटायर्ड व्यक्ति और उनकी पत्नी चंद्रकांता को हाल ही में कोरोना हो गया। बेटी बरखा ने किसी तरह अपनी मां को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। मगर वहां से एक दिन बाद उन्हें मना कर दिया गया। इसके बाद बरखा ने मां को उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शुक्रवार को उनकी मौत हो गई।

किसी ने भी कोरोना के शव को एंबुलेंस से नहीं उतारा !

बरखा अपनी मां का शव लेकर कनखल स्थित श्मशान घाट पहुंचीं और अंतिम संस्कार की सभी क्रियाएं पूरी कराईं। इससे पहले श्मशान घाट पहुंचने के बाद किसी ने भी कोरोना संक्रमित के शव को एंबुलेंस से उतारने से मना कर दिया। इसके बाद समाजसेवी भूपेंद्र कुमार और भाजपा नेता अन्नू कक्कड़ ने एक युवक के साथ मिलकर शव को एंबुलेंस से उतरवाया और अंतिम संस्कार कराया।

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