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आगरा : प्रख्यात शिक्षाविद व आगरा तथा रुहेलखंड विश्विद्यालय के कुलसचिव डा़ रामावतार शर्मा के निधन पर अशोक अग्रवाल की कलम से.....!!

by Khabar7 - 30-Mar-2021 | 13:08:39
आगरा : प्रख्यात शिक्षाविद व आगरा तथा रुहेलखंड विश्विद्यालय के कुलसचिव डा़ रामावतार शर्मा के निधन पर अशोक अग्रवाल की कलम से.....!!

30 मार्च 2021,

आगरा !!

रुहेलखंड विश्वविद्यालय और आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव , एक शिक्षाविद् , सेंट ऐंद्रज विद्यालयों की शृंखला के संस्थापक व अपनी पीड़ी के आखिरी चिराग डा़ रामावतार शर्मा का निधन हो गया।

मेरी उनको सादर विनम्र शद्धांजलि । 

यूं तो डा़ शर्मा के साथ बिताये लम्हे यादों में घूम रहे हैं....
, उनमे से कुछ का जिक्र करता हूँ.....

जब डा शर्मा के सबसे बड़े भाई स्व मदन पटैल बड़ी भारी मुसीबत में फंस गये थे, तब अक्सर मेरे पिताजी स्व डोरीलाल जी अग्रवाल से मिलने और परामर्श करने स्व आनन्द शर्मा व डा रामावतार शर्मा आते थे। तब मैंने दोनों भाइयों की सहता, सरलता और आदर का भाव कई बार देखा, जिसका असर मेरे ऊपर भी पड़ा।

मुझे ऐसा लगता था मानो वह मेरे परिवार का ही सम्बन्धी है !

दूसरी घटना तब की है जब डा शर्मा रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुल सचिव होकर बरेली पहुंचे। मैं उस समय बरेली में ही रहता था। उस समय में यदि कभी कोई आगरा से, मेरा परिचित बरेली आता था, और मुझे सूचना किसी भी भाध्यम से मिल जाये तो मेरे आमंत्रण पर वो व्यक्ति मेरे घर पर भोजन करने जरूर आता था। तब उस आगरा के अतिथि का स्वागत कर मुझे ऐसा लगता था मानो वह मेरे परिवार का ही सम्बन्धी है।

जब मुझे पता चला कि, डा शर्मा बरेली अकेले ही आये हैं, तो मैने एक दिन फोन किया कि डा.साहब अगर रसोइये के खाने से ऊब गये हों तो मेरे घर पर भोजन के लिए पधारें।
खैर दिन और समय भी तय हो गया और डा शर्मा मेरे घर पर पधारे।

फोन आने पर ऐसा लगा कोई अपना बुला रहा है !

भोजन के दौरान डा शर्मा अचानक द्रवित से हो गये, मैंने पूछा कि क्या हुआ डा.साहब?  तब उन्होंने बताया कि, एकाकी जीवन क्या होता है यह मैंने पहली बार इस अनजान शहर बरेली में महसूस किया। दिनभर काम के बाद, जहां में रुका हुआ हूँ शाम को, वहां की तनहाई और सन्नाटा।  मैं कतई अकेला सा महसूस कर रहा था। आपका फोन आने पर ऐसा लगा कोई अपना बुला रहा है।मैंने कहा डा.साहब , इसे अपना ही घर समझिए, चाहे जब आ जाइए । डा.साहब भोजन के बाद बड़ी प्रन्नता से विदा हुए ।

सबसे दुखदाई स्थिति यह हो गई कि, मात्र छ: महीने के भीतर इस परिवार के तीन लोग इस दुनिया से विदा हो गये। प्रभु अब बचे लोगों पर अपनी कृपा बनाये रखना। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि, वह दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे तथा शोक पीड़ित परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति दें।       

-अशोक अग्रवाल....
(लेखक अमर उजाला समूह के पूर्व चेयरमैन व प्रधान संपादक रहे हैं)  

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