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दर्शन किए बगैर चार धाम से लौट रहे तीर्थयात्री, केदारनाथ में भी बिगड़े हालात !!

by Khabar7 - 29-Sep-2021 | 18:13:17
दर्शन किए बगैर चार धाम से लौट रहे तीर्थयात्री, केदारनाथ में भी बिगड़े हालात !!

29 सितंबर 2021,

हाईलाइट्स -

कई किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद तीर्थयात्री परेशान !

प्रतिदिन केवल 800 यात्रियों को ही दर्शन की अनुमति !

प्रदेश सरकार की तैयारियों पर खड़े हो रहे सवाल !

केदारनाथ !!

चार धाम यात्रा उन लोगों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं जो देश के अलग-अलग राज्यों से दर्शन करने पवित्र धाम जा रहे हैं. यहां पहुंचकर भी तीर्थयात्रियों को दर्शन करने करने का सौभाग्य नहीं मिल रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रतिदिन केवल 800 यात्रियों को ही दर्शन की अनुमति है. इसके चलते 18 सितंबर से शुरू हो रही चार धाम यात्रा को लेकर प्रदेश सरकार की तैयारियों और नियमों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं|
 
चार धाम यात्रा पर आए बुजुर्ग यात्री अब हाथ जोड़कर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से फरियाद कर रहे हैं कि उन्हें धामों के दर्शन करने दिए जाएं. वह तीन-चार दिनों से कई किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद भी परेशान हैं. कहीं खाने के लिए नहीं मिल रहा तो कहीं सोने की जगह नहीं हैं. जिन लोगों को धाम में दर्शन नहीं करने दिए गए, उन तीर्थयात्रियों ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उत्तराखंड सरकार नहीं जागी तो भविष्य में कोई भी चार धाम यात्रा के लिए उत्तराखंड नहीं आएगा. कई राज्यों से लोग चार धाम के दर्शन को पहुंच रहे हैं. लेकिन ई-पास और देवास्थानम बोर्ड पास के बिना यात्रियों को आगे नहीं जाने दिया जा रहा है. इसे लेकर यात्रियों ने हंगामा शुरू कर दिया है|

मैनुअल पास की संख्या एक हजार तय !

उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए गए नियमों की कहीं सही जानकारी नहीं दी जा रही है. यात्रियों का कहना है कि रास्ते में सफर करते-करते पूरा दिन निकल रहा है. लोगों को मजबूरन गाड़ियों में ही सोना पड़ रहा है. बद्रीनाथ में ई-पास वाले तीर्थयात्रियों के ना पहुंचने पर दूसरे यात्रियों के मैनुअल पास बनाए जा रहे हैं. इससे थोड़ी बहुत राहत है. हालांकि मैनुअल पास की संख्या भी एक हजार तय की गई है. केदारनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं को ई-पास की दिक्कत हो रही है. यहां भी मैनुअल पास बन रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी संख्या से परेशानी ज्यादा हो रही है|

इस परेशानी की कुछ हद तक वजह वो लोग भी हैं जिन्होंने घर बैठे कई रजिस्ट्रेशन कर लिए हैं, मगर यात्रा पर नहीं पहुंच रहे हैं. इस वजह से रजिस्ट्रेशन ब्लॉक हो गए हैं. इस असुविधा से बचने के लिए प्रशासन को मौके पर ही रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत है ताकि वास्तविक स्थिति के अनुसार ही तीर्थयात्रियों को भेजा जा सके|

फिलहाल पुलिस तीर्थयात्रियों को समझाने की कोशिश कर रही है. हालात न बिगड़ें, इसके लिए पुलिस बल की संख्या बढ़ा दी गई है. प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुसार, जिनके पास ई-पास और देवास्थानम बोर्ड पास है, उन्हें ही धाम के दर्शन के लिए भेजा जा रहा है. चारों धामों में यही हालात हैं. लोगों की परेशानी को देखते हुए उत्तराखण्ड सरकार यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए फिर से कोर्ट जाने का मन बना रही है|

सरकार ने फिर हाईकोर्ट जाने का मन बनाया !

प्रदेश में चार धाम यात्रा 18 सितंबर को शुरू हुई थी. रविवार तक 17,552 तीर्थयात्री चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं. 15 अक्तूबर तक चारों धामों में इस संख्या के आधार पर रजिस्ट्रेशन फुल हो चुके हैं. इसे देखते हुए अब सरकार ने फिर हाईकोर्ट जाने का मन बना लिया है. सरकार कोर्ट से आग्रह करेगी कि तीर्थयात्रियों की समस्या को देखते हुए प्रतिदिन के लिए तय संख्या को बढ़ा दिया जाए|

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि चारों धामों में सीमित संख्या होने से कई तीर्थ यात्री बिना दर्शन के वापस लौट रहे हैं. अब यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए कोर्ट से आग्रह किया जाएगा. इसके लिए जल्द याचिका दायर की जाएगी. बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों की ओर से चार धाम यात्रा के लिए स्थानीय लोगों के रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई थी|

यात्रा के अंतिम महीने में जहां देश के कोने-कोने से लोग दर्शन करने के लिए आए हैं और परेशानी झेल रहे हैं तो वहीं स्थानीय व्यापारी वर्ग भी परेशान है. उनका कहना है कि ऐसा ही चलता रहा दूर-दराज से आए लोग कैसा अनुभव लेकर लौटेंगे. ऐसे में पूरे उत्तराखंड की ही बदनामी होगी जो किसी भी हालत में सही नहीं है|

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