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उत्तराखंड : 51 मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त कराने के लिए मुहिम छेड़ेगी VHP !!

by Khabar7 - 17-Feb-2021 | 14:16:31
उत्तराखंड : 51 मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त कराने के लिए मुहिम छेड़ेगी VHP !!

17 फरवरी 2021,

हाईलाइट्स -

मंदिरों का सरकारीकरण हिंदुओं की आस्था में दखल : VHP !

51 मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त करने की मांग !

2019 में बना था चार धाम देवस्थानम बोर्ड !

केदारनाथ !!

उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री जैसे चार धामों और अन्य 47 मंदिरों के अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार की ओर देवस्थानम बोर्ड बनाए जाने के मुद्दे पर विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया है. VHP का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग राशि जुटाने का अभियान मार्च में खत्म हो जाने के बाद उत्तराखंड के मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त कराने के लिए मुहिम छेड़ी जाएगी|

कब बना उत्तराखंड में चार धाम देवस्थानम बोर्ड ? 

दिसंबर 2019 में उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत प्रदेश के 51 मंदिरों का प्रबंधन हाथ में लेने के लिए एक्ट के जरिए चार धाम देवस्थानम बोर्ड बनाया. इस एक्ट को मंजूरी मिलने से पहले से ही मंदिरों के पुरोहितों ने इस बोर्ड और मंदिरों के सरकारीकरण का विरोध शुरू कर दिया था. उत्तराखंड सरकार के इस कदम को हिन्दुओं की आस्था में दखल करार देते हुए साधु-संत समाज ने भी पुरोहितों का साथ देने का एलान किया. यहां तक कि साधु समाज, पंडा समाज और पुरोहित समाज की ओर से उत्तराखंड विधानसभा का घेराव तक किया गया|

पुरोहितों और संत समाज की मांग है कि राज्य सरकार 51 मंदिरों के अधिग्रहण के फैसले को वापस ले. इस सरकारी फैसले के ख़िलाफ़ पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपील की. लेकिन 21 जुलाई 2020 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक्ट को संवैधानिक करार देते हुए डॉ स्वामी की अपील को नामंजूर कर दिया. हाईकोर्ट के इस फैसले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राहत की सांस ली थी. मुख्यमंत्री का मानना है कि लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रदेश में आते हैं, ऐसे में देवस्थानम बोर्ड के गठन से उनको बहुत सी सुविधाएं मिलनी शुरू जाएंगी और आसपास के क्षेत्र में विकास तेज होगा|

सुप्रीम कोर्ट में पांच याचिकाएं लंबित !

डॉ स्वामी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले को पिछले साल 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. डॉ स्वामी की याचिका के अलावा इसी मुद्दे पर चार और याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं|

दूसरी और पुरोहितों और संत समाज की ओर से इस मुद्दे पर विरोध लगातार जारी है. इनका कहना है कि ये मंदिर पुरोहित समाज के पूर्वजों के बनाए हैं और उन्हीं की पीढ़ियां वर्षों से यहां की देखभाल और पूजा अर्चना करती आ रही हैं. गंगोत्री धाम के पुरोहित रजनीकांत सेमवाल ने मीडिया को बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने अपना विरोध विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामने भी दर्ज कराया|

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