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यूपी : अपनों के ताबड़तोड़ इस्तीफों ने बढ़ाई भाजपा के सहयोगियों की सियासी अहमियत !!

by Khabar7 - 13-Jan-2022 | 13:29:48
यूपी : अपनों के ताबड़तोड़ इस्तीफों ने बढ़ाई भाजपा के सहयोगियों की सियासी अहमियत !!

13 जनवरी 2022,
 
हाईलाइट्स -

OBC के बड़े नेता लगातार छोड़ रहे पार्टी ! 
 
भाजपा के सामने सोशल इंजीनियरिंग को बचाने की चुनौती !

अपना दल (एस) और निषाद पार्टी का दबाव !

लखनऊ/नई दिल्ली !!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के औपचारिक ऐलान के साथ ही जिस तरह OBC के तमाम नेता भाजपा छोड़कर जा रहे हैं, उससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी और अपना दल (एस) की गठबंधन में सियासी अहमियत और बार्गेनिंग पोजिशन बढ़ गई है, क्योंकि इन दोनों दलों का आधार भी OBC समुदाय के बीच है. यही वजह है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने दोनों ही सहयोगी दलों के साथ बैठक कर सीट बंटवारे पर मंथन किया|

अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद -

भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने बुधवार को निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल के साथ बैठक की. इस दौरान भाजपा ने अपने दोनों सहयोगी दलों से गठबंधन में रहने का भरोसा मांगा. इसकी वजह यह थी कि दो दिनों से यह चर्चा थी कि अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के नेता भी समाजवादी पार्टी में जा सकते हैं. इसीलिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सक्रिय होकर डैमेज कन्ट्रोल करने में जुट गया है|

OBC के बीच बिगड़ा भाजपा का खेल !

दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान जैसे कद्दावर ओबीसी नेताओं का योगी कैबिनेट से इस्तीफा होने के साथ-साथ चार अन्य विधायकों ने भी भाजपा छोड़ दी है. भाजपा छोड़ने वाले दोनों ही OBC नेताओं ने दलित, पिछड़ों, वंचितों के साथ भेदभाव करने का योगी सरकार पर आरोप लगाया है. ऐसे में बीजेपी के सामने अपने उस सोशल इंजीनियरिंग को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है, जिसके बूते उसे 2017 के चुनाव में ऐतिहासिक बहुमत हासिल हुआ था| 

भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) यानी अनुप्रिया पटेल पर भी निगाहें टिकी हैं. ओबीसी कद्दावर पिछले नेताओं को छोड़ने के बाद अब भाजपा के सहयोगियों ने भाजपा पर दबाव बढ़ा दिया है. अनुप्रिया पटेल ने 36 सीटों की मांग भाजपा से की है, जिसमें पूर्वांचल के अलावा अवध बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र में भी सीटें शामिल हैं| 

2017 में जब अमित शाह ने गठबंधन बनाया था तब अपना दल ने 17 सीटों की मांग रखी थी, लेकिन सीट शेयरिंग में अपना दल को भाजपा ने 11 सीटें दी थी. ऐसे में अपना दल का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा था, वो 11 सीटों में 9 सीट जीत कर आई थी. इस बार अपना दल की मांग 3 गुने से भी ज्यादा है. अपना दल (एस) को लगता है कि कम से कम 2 दर्जन सीटों पर उनका मजबूत दावा है|

स्वामी प्रसाद के भाजपा  छोड़ने पर अपना दल (एस) के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष पटेल ने कहा था कि स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा और NDA से जाना दुखद है. पटेल ने कहा कि 'भाजपा को OBC नेताओं के आत्‍मसम्‍मान का ध्‍यान रखना चाहिए और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पूरे मामले को अपने हाथ में लें| 

शाह के साथ सहयोगी दलों की बैठक !

इसी के बाद भाजपा केंद्रीय नेतृत्व एक्शन में आया. निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को दिल्ली बुलाया गया तो अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल से बात की. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कोर कमेटी के बाकी सदस्यों में धर्मेंद्र प्रधान, सुनील बंसल, योगी आदित्यनाथ के साथ संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल की मीटिंग हुई. इस दौरान सीट शेयरिंग को लेकर भी चर्चा हुई है. सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार कोभाजपा की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक के बाद सीटों का ऐलान किया जा सकता है|

सहयोगी दलों का भाजपा पर दबाव !

2017 के विधानसभा चुनाव में 2017 मेंभाजपा  ने अपना दल (एस) को 11 सीटें मिली थी, जिनमें से 9 सीटों पर उसे जीत मिली थी. वहीं, ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 8 सीटें दी थीं, जिनमें से 4 सीटों पर उसे जीत मिली थी. राजभर इस बार भाजपा का साथ छोड़कर सपा के साथ गठबंधन कर लिया है. ऐसे में भाजपा ने निषाद पार्टी के साथ हाथ मिला लिया है|

अपना दल (एस) पिछली बार से ज्यादा सीटों पर इस बार चुनाव लड़ने का मन बनाया है. पार्टी के अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल कह चुकी हैं कि पांच साल में हमारी पार्टी का जनाधार बढ़ा है और पार्टी का सियासी विस्तार के लिए हम पिछली बार से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. तीन दर्जन सीटों पर दावेदारी की है|

वहीं, निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद भी लगातार सीटों की डिमांड कर रहे हैं. डॉ. संजय निषाद ने दिल्ली में बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि हमें डेढ़ दर्जन सीटें देने का भरोसा बीजेपी नेतृत्व ने दिया है|

भाजपा में जिस तरह से OBC नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, उससे दोनों ही सहयोगी दल की बार्गनिंग पोजिशन बढ़ गई है. ऐसे में अपना दल (एस) का सियासी आधार कुर्मी समाज के बीच है तो निषाद पार्टी का आधार निषाद, मल्लाह, कश्यप जाति के बीच है. यूपी का चुनाव जिस तरह से ओबीसी केंद्रित हो रहा है, उससे बीजेपी के लिए अपने दोनों सहयोगी को साथ जोड़कर रखने की चुनौती है. ऐसे में बीजेपी उनके कुछ सीटों पिछली बार से बढ़ाकर दे सकती है|

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