khabar7 logo
khabar-seven

यूपी पंचायत चुनाव : अयोध्या-मथुरा-काशी तीनों जगह गश खाकर गिरी भाजपा, सपा के पक्ष में बहती हवा !!

by Khabar7 - 04-May-2021 | 09:39:38
यूपी पंचायत चुनाव : अयोध्या-मथुरा-काशी तीनों जगह गश खाकर गिरी भाजपा, सपा के पक्ष में बहती हवा !!

04 मई 2021,

हाईलाइट्स -

पंचायत चुनाव में सपा ने भाजपा को दी मात !

PM मोदी के काशी में भी सपा की जीत !

राम से लेकर कृष्ण की नगरी तक भाजपा हारी !

राजकुमार विज का खास विश्लेषण !!

यूपी पंचायत चुनाव में भाजपा को सियासी तौर पर बड़ा झटका लगा है. अयोध्या से लेकर मथुरा और काशी सहित प्रदेश भर में सपा ने भाजपा को करारी मात दी है. यूपी के ये तीनों जिला योगी आदित्यनाथ सरकार के एजेंडे में शामिल रहे हैं और पिछले चार सालों में इन जिलों पर सरकार काफी मेहरबान रही है. इसके बावजूद अयोध्या-मथुरा-काशी में मिली करारी मात एक बड़ा सियासी संदेश दे रही है।

पश्चिम बंगाल के नतीजों के बाद भाजपा की नींद उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के नतीजों ने उड़ा दी है. इन चुनावों में भाजपा को सियासी तौर पर बड़ा झटका लगा है। अयोध्या से लेकर मथुरा और काशी सहित प्रदेश भर में सपा ने भाजपा को करारी मात दी है। 

रामनगरी अयोध्या में भाजपा की दुर्गति !

राम की नगरी अयोध्या में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा. अयोध्या जनपद में कुल जिला पंचायत सदस्य की 40 सीटें हैं, जिनमें से 24 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने परचम फहराया है। यहां भाजपा को महज 6 सीटें ही मिली हैं. इसके अलावा 12 सीटों पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है. भाजपा को यहां अपने बागियों के चलते करारी मात खानी पड़ी है, क्योंकि 13 सीटों पर पार्टी के नेताओं को टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे थे. हालांकि, अयोध्या की सियासत को लेकर भाजपा कुछ भी दावा करती रही हो, लेकिन सपा का यहां अपना बड़ा जनाधार है. इसके बावजूद भाजपा का अयोध्या में ऐसे समय हारना जब वहां राममंदिर का निर्माण हो रहा है और भाजपा उसका क्रेडिट ले रही है, तो समझ लीजिए की अंदरूनी कहानी क्या है।

PM मोदी के काशी में सपा आगे !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी भाजपा की हालत चिंताजनक है. MLC चुनाव के बाद भाजपा को जिला पंचायत चुनाव में भी काशी में करारी मात मिली है। जिला पंचायत की 40 सीटों में से भाजपा के खाते में मात्र 8 सीटें आई हैं। वहीं समाजवादी पार्टी ने यहां 14 सीटों पर कब्जा किया है। बसपा की बात करें तो उसने यहां पांच सीटों पर जीत हासिल की है, हालांकि बनारस में, अपना दल(एस)को 3 सीट मिली हैं. आम आदमी पार्टी और ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी 1-1 सीट मिली है। इसके अलावा 3 निर्दलीय प्रत्याशियों को भी जीत मिली है. 2015 में भी काशी में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन योगी सरकार के बनने के बाद भाजपा ने जिला पंचायत की कुर्सी सपा से छीन ली थी।

कान्हा की नगरी में बसपा आगे !

भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा जिले की बात करें तो यहां भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। मथुरा में बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी है, यहां पर बसपा के 12 उम्मीदवारों ने जीत का परचम फहराया है. बसपा के बाद RLD ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, भाजपा 8 सीटों पर ही सिमट कर रह गई. सपा को 1 सीट से काम चलाना पड़ा। 3 निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए. मथुरा में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया. खुद कांग्रेस जिलाध्यक्ष चुनाव हार गए। माना जा रहा है कि मथुरा में भाजपा की हार किसानों की नाराजगी के चलते हुई है।

बंगाल चुनाव में नहीं चला, जय श्रीराम का उद्घोष !

आपको बता दें कि, भाजपा की स्थापना के दौर से ही अयोध्या-मुथरा-काशी एजेंडे में शामिल रहा है। भाजपा इन जिलों में स्थित धार्मिक स्थलों के नाम पर अपनी सियासत यूपी में नहीं बल्कि देशभर में करती रही है। आज जो पूरे देश में भाजपा का जनाधार है, उसकी शुरुआत इन धार्मिक स्थलों के एजेंडे को मुखर करके भाजपा ने पाया है।

1990 के बाद से ही भाजपा इन धार्मिक स्थलों के नाम पर देश के हर हिस्से में चुनाव में उतरती आई है इसकी बानगी हालिया हुए बंगाल चुनाव में भी देखी गई जब प्रधानमंत्री मोदी ने जय श्री राम के नारों के साथ बंगाल की राजनीति को गरमाने की कोशिश की, यह अलग बात है कि, बंगाल की जनता पर प्रधानमंत्री के इन नारों का कोई असर नहीं दिखा और बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी पहले से भी बेहतर प्रदर्शन करते लगातार तीसरी बार सत्ता तक जा पहुंची।

अभी खत्म नहीं हुआ मायावती का सियासी असर !

अब उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में भाजपा का इन तीनों जिलों में करारी हार का बड़ा झटका है। वहीं, PM मोदी के संसदीय क्षेत्र में लगातार सपा भाजपा को मात देती जा रही है। मथुरा में बसपा का नंबर वन पर आना यह बता रहा है कि मायावती का सियासी असर भी उतना खत्म नहीं हुआ है, जितना सोचा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक आठ महीने पहले पंचायत चुनाव को 2022 का सेमीफाइनल माना जा रहा था। यह चुनाव सत्ताधारी भाजपा के साथ-साथ विपक्षी समाजवादी पार्टी, BSP और कांग्रेस के लिए भी अहम है। गांवों की सरकार के लिए हो रहे इस चुनाव में पार्टियों की असली ताकत जिला पंचायत से तय होती है। यह चुनाव ही तय करते हैं कि किस पार्टी का किस जिले में कितना जनाधार है। 

उत्तर प्रदेश में एक बड़ी ताकत है सपा !

जिला पंचायत चुनाव के अब तक के नतीजों से यह बात साफ हो गई है कि, सपा को कमजोर समझना भाजपा की भूल थी इन चुनावों ने दिखा दिया कि सपा अभी कमजोर नहीं हुई है। इन चुनावों में सपा ने सभी को यह बता दिया है कि वह उत्तर प्रदेश में एक बड़ी ताकत है वहीं दूसरी ओर भाजपा जिस हिंदुत्व एजेंडे को लेकर अयोध्या मथुरा और काशी का ढोल पीटते हुए सत्ता में आई थी उन्ही जिलो अयोध्या-मथुरा-काशी में भाजपा की करारी हार ने योगी सरकार की नींद उड़ा दी है।

राज्य की राजनीति में अब ये सवाल भी उछल गया है कि, सूबे में लगभग अजेय नजर आ रही भाजपा को इन लिटमस टेस्ट माने जा रहे पंचायत चुनावों में करारी हार क्यों मिली? पार्टी के रणनीतिकारों को गंभीर मंथन करना होगा और देखना होगा कि, पार्टी का जनाधार अचानक इतना कैसे खिसक गया। सवाल यह भी है कि इन त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में समाजवादी पार्टी को जो आशातीत सफलता मिली है क्या वह विधानसभा चुनावों तक इसे बरकरार रख पाएगी।

Share: