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दारुल उलूम देवबंद ने 3000 मदरसों को सरकारी अनुदान लेने से किया इंकार !!

by Khabar7 - 15-Mar-2018 | 12:27:21
दारुल उलूम देवबंद ने 3000 मदरसों को सरकारी अनुदान लेने से किया इंकार !!

15 मार्च 2018,

सहारनपुर !!

मदरसा मैनेजमेंट में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचने के लिए दारुल उलूम देवबंद ने मदरसों को सरकारी अनुदान लेने से मना कर दिया है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित मुस्लिम समुदाय के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने यह आदेश पूरे देश में उनसे संबद्ध 3,000 मदरसों को भेजा है।
 
दारुल उलूम का कहना है कि देश के मदरसों का अधिकांश खर्चा समुदाय के दान दिए गए रुपयों से चलता है। सरकारी अनुदान से सिर्फ शिक्षकों का वेतन दिया जाता है। अब समुदाय के दान से ही शिक्षकों का वेतन भी दिया जाएगा। 

दूसरे समुदायों से रिश्ते बेहतर करने की पहल !

सोमवार को राबता-ए- मदरिस की बैठक में 8 बड़े फैसले लिए गए। मदरसा मैनेजमेंट से कहा गया है कि वे उनके संपत्ति के रेकॉर्ड्स अपडेट रखें। दारुल उलूम ने पत्र भेजकर कहा है कि मदरसों में आयोजित होने वाले समारोह और त्योहारों पर दूसरे धर्म और समुदाय के लोगों को बुलाएं और उनसे मैत्रीपूर्ण संबंध बनाएं। 

वर्किंग कमिटी में 51 सदस्यों को रखा गया है। इनमें से दारुल उलूम के 10 शुरा, 10 वरिष्ठ उस्ताद और 31 संबद्ध मदरसों के शिक्षकों को शामिल किया गया है। 

दारुल उलूम के मोहतमीम अब्दुल कासिम नोमानी ने कहा कि उन लोगों ने फैसला ले लिया है कि किसी भी तरह की सरकारी मदद मदरसों में स्वीकार नहीं की जाएगी। एक बार जब मदरसा को सरकारी अनुदान मिलने लगता है तो वह दूसरे सरकारी स्कूलों में लागू दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। 

सरकारी हस्तक्षेप से बचने की कोशिश !

उन्होंने कहा कि मदरसों का अपना अलग अनुशासन, नियम, यूनिफॉर्म और पाठ्यक्रम है और वे लोग इसमें सरकारी हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं। वे लोग नहीं चाहते हैं कि सरकार उनसे रोज शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति और अनुपस्थिति का रेकॉर्ड मांगे इसलिए 3000 मदरसों को साफ कहा गया है कि वे सरकारी अनुदान न लें। 

दारुल उलूम वक्फ के मुफ्ती आरिफ कासिम ने कहा कि दारुल उलूम की पूरी दुनिया के मुसलमानों के बीच एक अलग पहचान है। दारुल उलूम जिन सिद्धांतों और प्रकृति पर चलता है उसमें किसी तरह का हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। सरकारी अनुदान लेने पर सरकार धर्म से जुड़े मुद्दों पर भी हस्तक्षेप करने लगती है। 

सरकार देती है वेतन का 80 फीसदी फंड !

बैठक में दारुल उलूम के वरिष्ठ शिक्षकों ने यह चिंता जाहिर की है कि गैर मुस्लिम समुदाय के बीच मदरसा शिक्षा की छवि खराब हो गई है। इस पर नोमानी ने कहा कि दूसरे धर्म के लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाएं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में गैर मुस्लिम लोगों के मदरसा में बुलाएं ताकि उनके बीच मदरसों की छवि अच्छी हो सके। 

अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारियों की मानें तो मदरसों में शिक्षकों को दिए जाने वाले वेतन का 80 फीसदी फंड सरकार देती है। एक बार मदरसे की सरकारी संबद्धता होने के बाद सरकार शिक्षकों का वेतन देने लगती है। इतना ही नहीं किताबें, अध्ययन सामग्री, यूनिफॉर्म, मिड डे मील और दूसरे खर्च भी सरकार ही मदरसों को देती है।  

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